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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 3.50

दे॒हि मे॒ ददा॑मि ते॒ नि मे॑ धेहि॒ नि त दधे । नि॒हारं॑ च॒ हरा॑सि मे नि॒हारं॒ नि ह॑राणि ते॒ स्वाहा॑ ॥५०॥

पूरा अध्याय