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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 3.51

अक्ष॒न्नमी॑मदन्त॒ ह्यव॑ प्रि॒या अ॑धूषत ।
अस्तो॑षत॒ स्वभा॑नवो॒ विप्रा॒ निवि॑ष्ठया म॒ती योजा॒ न्वि॒न्द्र ते॒ हरी॑ ॥५१॥

पूरा अध्याय