Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.62

आ न॑ एतु॒ मनः॒ पुनः॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ । ज्योक् च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे ॥४॥

पूरा अध्याय