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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 3.61

मनो॒ न्वाहु॑वामहे नाराश॒ᳪसेन॒ स्तोमे॑न । पि॒तॄ॒णां च॒ मन्म॑भिः ॥३॥

पूरा अध्याय