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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.47

अ॒स्मादन्ना॑द॒स्यै प्र॑ति॒ष्ठाया॒ अग॑न्म॒ स्वः॑ । सं ज्योति॑षाभूम ॥४॥

पूरा अध्याय