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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 2.48

स्व॒यं॒भूर॑सि॒ श्रेष्ठो॑ र॒श्मिर्व॑र्चो॒दा अ॑सि॒ वर्चो॑ मे देहि । सूर्य॑स्या॒वृत॒मन्वाव॑र्ते ॥५॥

पूरा अध्याय