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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.93

या ओष॑धीः॒ सोम॑राज्ञीर्ब॒ह्वीः श॒तवि॑चक्षणाः । तासा॑मसि॒ त्वमु॑त्त॒मारं॒ कामा॑य॒ शᳪ हृ॒दे ॥१८॥

पूरा अध्याय