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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.94

या ओष॑धीः॒ सोम॑राज्ञी॒र्विष्ठि॑ताः पृथि॒वीमनु॑ । बृह॒स्पति॑प्रसूता अस्यै॒ संद॑त्त वी॒र्य॑म् ॥१९॥

पूरा अध्याय