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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.78

७७ (७१०)
ओष॑धीः॒ प्रति॑ गृभ्णीत॒ पुष्प॑वतीः प्र॒सूव॑रीः । अश्वा॑ इव स॒जित्व॑रीर्वी॒रुधः॑ पारयि॒ष्ण्वः॑ ॥३॥

पूरा अध्याय