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शुक्ल यजुर्वेद (काण्व) 13.77

श॒तं वो॑ अम्ब॒ धामा॑नि स॒हस्र॑मु॒त वो॒ रुहः॑ । अधा॑ शतक्रत्वो यू॒यमि॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑त ॥२॥

पूरा अध्याय