ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5252.18वाल्मीकि रामायण 52.18एवमेतन्नरश्रेष्ठ यथा वदसि लक्ष्मण । परितोषश्च मे वीर मम कार्यानुशासने ।। ७.५२.१८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय