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वाल्मीकि रामायण 52.19

निवृत्तिश्चागता सौम्य सन्तापश्च निराकृतः ।
भवद्वाक्यैः सुरुचिरैरनुनीतो ऽस्मि लक्ष्मण ।। ७.५२.१९ ।।

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