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वाल्मीकि रामायण 4.24

ततः सा राक्षसी गर्भं घनगर्भसमप्रभम् ।
प्रसूता मन्दरं गत्वा गङ्गा गर्भमिवाग्निजम् ।। ७.४.२४ ॥

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