ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 44.25वाल्मीकि रामायण 4.25समुत्सृज्य तु सा गर्भं विद्युत्केशरतार्थिनी । रेमे तु सार्धं पतिना विस्मृत्य सुतमात्मजम् ।। ७.४.२५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय