ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 108108.35वाल्मीकि रामायण 108.35एवमुक्तस्तु हनुमान्राघवेण महात्मना । वाक्यं विज्ञापयामास परं हर्षमवाप्य च ।। ७.१०८.३५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय