ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 108108.36वाल्मीकि रामायण 108.36यावत्तव कथा लोके विचरिष्यति पावनी । तावत्स्थास्यामि मेदिन्यां तवाज्ञामनुपालयन् ।। ७.१०८.३६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय