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वाल्मीकि रामायण 108.34

मत्कथाः प्रचरिष्यन्ति यावल्लोके हरीश्वर ।
तावद्रमस्व सुप्रीतो मद्वाक्यमनुपालयन् ।। ७.१०८.३४ ॥

पूरा अध्याय