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वाल्मीकि रामायण 93.63

वेदविद्याव्रतस्नातः स्वकर्मनिरतः सदा।
स्त्रियाः कस्माद्वधं वीर मन्यसे राक्षसेश्वर ।। ६.९३.६३ ।।

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