ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 9393.64वाल्मीकि रामायण 93.64मैथिलीं रूपसम्पन्नां प्रत्यवेक्षस्व पार्थिव। त्वमेव तु सहास्माभी राघवे क्रोधमुत्सृज ।। ६.९३.६४ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय