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वाल्मीकि रामायण 86.29

युद्ध्यस्व यदि शूरो ऽसि रावणात्मज दुर्मते।
वायुपुत्रं समासाद्य जीवन्न प्रतियास्यसि ।। ६.८६.३० ।।

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