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वाल्मीकि रामायण 86.28

तानि शस्त्राणि घोराणि प्रतिगृह्य स मारुतिः।
रोषेण महता ऽ ऽविष्टो वाक्यं चेदमुवाच ह ।। ६.८६.२९ ।।

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