Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 86.27

सो ऽभ्युपेत्य शरान् खड्गान् पट्टिशांश्च परश्वधान्।
अभ्यवर्षत दुर्द्धर्षः कपिमूर्ध्नि स राक्षसः ।। ६.८६.२८ ।।

पूरा अध्याय