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वाल्मीकि रामायण 86.30

बाहुभ्यां प्रतियुध्यस्व यदि मे द्वन्द्वमाहवे।
वेगं सहस्व दुर्बुद्धे ततस्त्वं रक्षसां वरः ।। ६.८६.३१ ।।

पूरा अध्याय