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वाल्मीकि रामायण 79.33

तमापतन्तं ज्वलितं खरपुत्रकराच्च्युतम्।
बाणैस्तु त्रिभिराकाशे शूलं चिच्छेद राघवः ।। ६.७९.३३ ।।

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