ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5959.75वाल्मीकि रामायण 59.75तद्विकीर्णं गिरेः शृङ्गं दृष्ट्वा हरिचमूपतिः । कालाग्निरिव जज्वाल क्रोधोन परवीरहा ।। ६.५९.७६ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय