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वाल्मीकि रामायण 59.53

तमालोक्य महातेजा हनुमान् मारुतात्मजः ।
निवार्य शरजालानि प्रदुर्द्राव स रावणम् ।। ६.५९.५३ ।।।।

पूरा अध्याय