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वाल्मीकि रामायण 59.52

स रावणं वारणहस्तबाहुर्ददर्श दीप्तोद्यतभीमचापम् ।
प्रच्छादयन्तं शरवृष्टिजालैस्तान् वानरान् भिन्नविकीर्णदेहान् ।। ६.५९.५२ ।।।।

पूरा अध्याय