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वाल्मीकि रामायण 59.22

यश्चैष चापासिशरौघजुष्टं पताकिनं पावकदीप्तरूपम् ।
रथं समास्थाय विभात्युदग्रो नरान्तको ऽसौ नगशृङ्गयोधी ।। ६.५९.२२ ।।।।

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