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वाल्मीकि रामायण 59.21

यश्चैष जाम्बूनदवज्रजुष्टं दीप्तं सधूमं परिघं प्रगृह्य ।
आयाति रक्षोबलकेतुभूतस्त्वसौ निकुम्भो ऽद्भुतघोरकर्मा ।। ६.५९.२१ ।।।।

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