ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 5454.33वाल्मीकि रामायण 54.33व्रणैः सास्त्रैरशोभेतां पुष्पिताविव किंशुकौ । युद्ध्यमानौ परिश्रान्तौ जानुभ्यामवनीं गतौ ।। ६.५४.३३ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय