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वाल्मीकि रामायण 53.16

एतानौत्पातिकान् दृष्ट्वा वज्रदंष्ट्रो महाबलः ।
धैर्यमालम्ब्य तेजस्वी निर्जगाम रणोत्सुकः ।। ६.५३.१६ ।।।।

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