Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 52.25

धूम्राक्षस्तु धनुष्पाणिर्वानरान् रणमूर्धनि ।
हसन् विद्रावयामास दिशस्तु शरवृष्टिभिः ।। ६.५२.२५ ।।।।

पूरा अध्याय