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वाल्मीकि रामायण 47.20

तौ दृष्ट्वा भ्रातरौ तत्र वीरौ सा पुरुषर्षभौ ।
शयानौ पुण्डरीकाक्षौ कुमाराविव पावकी ।। ६.४७.२० ।।।।

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