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वाल्मीकि रामायण 43.28

वज्रमुष्टिस्तु मैन्देन मुष्टिना निहतो रणे ।
पपात सरथः साश्वः पुराट्ट इव भूतले ।। ६.४३.२८ ।।।।

पूरा अध्याय