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वाल्मीकि रामायण 27.34

परिवार्य अभिवर्तन्ते लंकाम् मर्दितुम् ओजसा ।
भ्रमर आचरिता यत्र सर्व काम फल द्रुमाः ॥६-२७-३४॥

पूरा अध्याय