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वाल्मीकि रामायण 27.35

यम् सूर्य तुल्य वर्ण आभम् अनुपर्येति पर्वतम् ।
यस्य भासा सदा भान्ति तद् वर्णा मृग पक्षिणः ॥६-२७-३५॥

पूरा अध्याय