Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 125.4

कृतप्रयत्नकर्माणो विभीषण वनौकसः ।
रत्नैरर्थैश्च विविधैर्भूषणैश्चापि पूजय ।। ६.१२५.४ ।।

पूरा अध्याय