Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 125.3

तमब्रवीन्महातेजा लक्ष्मणस्योपशृण्वतः ।
विमृश्य राघवो वाक्यमिदं स्नेहपुरस्कृतम् ।। ६.१२५.३ ।।

पूरा अध्याय