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वाल्मीकि रामायण 101.32

सा क्षिप्ता भीमवेगेन शक्राशनिसमस्वना ।
शक्तिरभ्यपतद्वेगाल्लक्ष्मणं रणमूर्धनि ।। ६.१०१.३२ ।।

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