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वाल्मीकि रामायण 65.14

अधःशय्या विवर्णाङ्गी पद्मिनीव हिमागमे ।
रावणाद्विनिवृत्तार्था मर्तव्यकृतनिश्चया ।देवी कथंचित् काकुत्स्थ त्वन्मना मार्गिता मया ।। ५.६५.१४ ।।।।

पूरा अध्याय