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वाल्मीकि रामायण 65.13

रावणान्तःपुरे रुद्धा राक्षसीभिः सुरक्षिता ।
एकवेणीधरा दीना त्वयि चिन्तापरायणा ।। ५.६५.१३ ।।।।

पूरा अध्याय