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वाल्मीकि रामायण 6.13

समुद्रम् इव गम्भीरम् समुद्रम् इव निह्स्वनम् ।
महात्मानो महद् वेश्म महा रत्न परिच्चदम् ॥५-६-१३॥

पूरा अध्याय