ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 66.13वाल्मीकि रामायण 6.13समुद्रम् इव गम्भीरम् समुद्रम् इव निह्स्वनम् । महात्मानो महद् वेश्म महा रत्न परिच्चदम् ॥५-६-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय