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वाल्मीकि रामायण 6.12

भेरीमृदङ्गाभिरुतम् शङ्खघोषनिनादितम् ।
नित्य अर्चितम् पर्व हुतम् पूजितम् राक्षसैः सदा ॥५-६-१२॥

पूरा अध्याय