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वाल्मीकि रामायण 58.59

सामया राक्षसीमध्ये तर्ज्यमाना मुहुर्मुहुः ।
एकवेणीधरा दीना भर्तृचिन्तापरायणा ।। ५.५८.५९ ।।।।

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