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वाल्मीकि रामायण 57.9

विविधाभ्रघनापन्नगोचरो धवलाम्बरः ।
दृश्यादृश्यतनुर्वीरस्तदा चन्द्रायते ऽम्बरे ।। 5.57.9 ।।।।

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