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वाल्मीकि रामायण 55.30

स तथा चिन्तयंस्तत्र देव्या धर्मपरिग्रहम् ।
शुश्राव हनुमान् वाक्यं चारणानां महात्मनाम् ।। 5.55.30 ।।।।

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