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वाल्मीकि रामायण 27.26

सहसोत्थाय सम्भ्रान्तो भयार्तो मदविह्वलः ।
उन्मत्त इव दिग्वासा दुर्वाक्यं प्रलपन् बहु ।। ५.२७.२६।।।।

पूरा अध्याय