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वाल्मीकि रामायण 27.25

पुनरेव मया दृष्टो रावणो राक्षसेश्वरः ।
पतितो ऽवाविछरा भूमौ गर्दभाद्भयमोहितः ।। ५.२७.२५।।।।

पूरा अध्याय