ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2727.27वाल्मीकि रामायण 27.27दुर्गन्धं दुस्सहं घोरं तिमिरं नरकोपमम् । मलपङ्कं प्रविश्याशु मग्नस्तत्र स रावणः ।। ५.२७.२७।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय