ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1313.41वाल्मीकि रामायण 13.41वानप्रस्थो भविष्यामि अदृष्ट्वा जनक आत्मजाम् । सागर अनूपजे देशे बहु मूल फल उदके ॥५-१३-४१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय